आजीवन प्राथमिक सदस्यता
सदस्यता का आमंत्रण : आज हमारे देश में जिन लोगों के हाथों में सत्ता एवं प्रशासन की संवैधानिक ताकत है, उनमें से अधिकतर का सच्चाई, ईमानदारी, इंसाफ आदि बातों से दूर का भी नाता नहीं है। अधिकतर तो भ्रष्टाचार के दलदल में अन्दर तक इतने धंसे हुए हैं कि वे खुद ही अपराधियों को संरक्षण भी देते हैं। आम व्यक्ति की किसी को चिन्ता नहीं है! ऐसे विकट हालात में आम व्यक्ति के पास केवल दो ही रास्ते बचते हैं:-